Wednesday, November 12, 2008

नई राह, नई चाह

युवा मन में तरक्की की चाह होना स्वाभाविक है और होना भी चाहिए, लेकिन इसके साथ मौकापरस्त होने का टैग नहीं लगना चाहिए। अगर यह टैग लग जाए तो कैरियर को ख़त्म होने में कुछ ही साल लगते हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए नई राह खोजने के लिए चाह हमेशा बनी रहनी चाहिए। यही चाह उसे शीर्ष पर पहुँचने में मदद करती है बशर्ते ईमानदारी का गुण कायम रहे, हालाँकि यह काम काफी कठिन होता है और दोस्त तथा परिजन कभी-कभी gussa हो jate हैं पर यह narajagi कुछ समय की होती है, इसका सम्मान करते हुए काम में आगे badate जाना चाहिए.

Friday, November 7, 2008

दिल्ली वालों को भी फिक्र है

जबलपुर में चुनाव कौन लड़ रहा है और किसकी क्या स्थिति है, इसकी फिक्र दिल्ली तक है। तरुण भानोत के लिए तो दिल्ली से दो दोस्तों के फोन इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आए। आशा है कि दोस्तों के कमेन्ट भी आएंगे।

Wednesday, November 5, 2008

बस अड्डे की खुशी

जबलपुर के बस अड्डे पर जुटने वाले पत्रकारों की खुशी समाये नहीं समां रही है क्योंकि उनके पांच दोस्तों को विधानसभा चुनाव का टिकट मिल गया है। सबसे खुश हैं छोटू भाई क्योंकि वे पहले से पॉलिटिकल आदमी हैं और चाहे लखन भाई हो या शरद भाई, दोनों उनके पॉलिटिकल साथी है। कदीर भाईजान भी उनके पुराने साथी हैं और रही संजू भाई की बात तो चूँकि वह आशीष भाई के कजिन हैं इस कारण सभी का हौसला और बुलंद है। हाँ, यह बात सभी को खल रही की एक ही सीट - मध्य से दो दोस्त - कदीर और शरद आमने सामने हैं, लेकिन यह तो चुनाव है दोनों में से जो भी जीतेगा वो होगा तो बस स्टैंड का दोस्त। अब तरुण को भी टिकट मिल गया है और नामांकन रैली से ही जोश दिखने लगा है, सभी को दोस्तों की जीत का इन्तजार है.

Saturday, November 1, 2008

ये वो विवेक तो नहीं

कहते हैं कि जो व्यक्ति पुराने मित्रों को भूल जाता है उसकी सुकीर्ति स्थाई नहीं रहती, भगवान ऐसा मेरे दोस्त विवेक के साथ नहीं होने देना। आज वह फ़िल्म इंडस्ट्री में नाम कमा रहा है, व्यस्तता में पुराने दोस्तों को याद नहीं कर पा रहा है, हो सकता है उसके आसपास जो लोग हैं वो उसे पुराने दोस्तों से दूर रख रहे हों, आज नहीं तो कल वो हम लोगों को याद जरूर करेगा, तब तक दिल को मनाने के लिए यह कहना बेहतर होगा- ये वो विवेक तो नहीं है.

Tuesday, October 28, 2008

निशाचर दोस्तों को सलाम

सभी दोस्तों को दीवाली की शुभकामनाए, खास कर उन दोस्तों को जो अपनी रातें दूसरों की रातें रोशन करने के लिए काली कर रहे है। मेरे उस दोस्त को भी हैप्पी दीवाली जो अपनी प्रेग्नेंट पत्नी के दीवाली पर पड़ रहे बर्थडे को भूलकर अपने उस सहयोगी की जगह पॉवर हाउस में रात्रि कालीन ड्यूटी कर रहा है जो अपनी शादी के बाद पहली दीवाली मनाने अपने गाँव गया है।

Saturday, October 25, 2008

मेरा प्यारा दोस्त

ये बात उस समय की है जब मै मांटेसरी स्कूल में पढ़ता था। उस वक्त हम लोग छोटे छोटे थे पर पढ़ने में कॉम्पिटिशन समझने लगे थे, पर सभी लोग तो फर्स्ट नही आ सकते थे इस लिए class teacher ने हर महीने के लिए किसी एक को फर्स्ट घोषित करने का तरीका खोज लिया। उन्होंने ये नही समझा कि इसका प्रभाव किसी के बालमन पर क्या पड़ेगा जब फर्स्ट न आने पर उसे घर में पिटाई पड़ेगी। मेरा सबसे प्यारा दोस्त संजीव घर में जमकर पिटा, वह भी तब जब हम लोग सुबह स्कूल जाने के लिए उसे लेने घर पहुंचे। बस फ़िर क्या था दोस्ती कुछ दिनों के लिए टूट गई और हम लोग अकेले अकेले स्कूल जाने लगे।

Wednesday, October 22, 2008

TRUTH OF FRIENDSHIP


हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ऐसे मित्र होते है जिनके कारण उसे दुश्मनों की जरूरत नही होती. ऐसे दोस्तों को हमेशा सहेज कर रखना चाहिए क्योंकि ये लोग जिंदगी में हौसला पैदा करते है, और जीने की राह दिखाते है. इन दोस्तों से सीखना चाहिए की वे अपने अमूल्य समय का उपयोग किस तरह दूसरों को बर्बाद करने के प्रयास में करते है और जब सफलता नही मिलाती तो उसके शरणागत होकर मित्रता की दुहाई देते है. भगवन ऐसे दोस्त किसी को न दे.